ए बारिश की बूंदे की अलग ही खुशी होती है। जब ये बारिश की बूंदे आती है सब पेड़ पौधे हरे भरे हो जाते हैं हर जगह हरियाली ही हरियाली नजर आने लगती है और किसानों में एक अलग ही उमंग देखने को मिलता है और साहब यह बारिश की बूंदे आपके समझ से परे है जब यह बारिश की बूंदे किसान देखते हैं उनके मन में उल्लास आ जाता है और मन खुश हो जाता है और किसान उल्लास में नाचने लगते हैं आप नहीं समझोगे साहब ए किसान की बातें हैं। और आप शहरी लोग ईद दुर्गा पूजा का स्वागत करते हैं और यह किसान है साहब यह मानसून का इंतजार करते हैं आप नहीं समझोगे साहब यह किसान की बातें हैं। और जो यह सेठ साहूकार लोग होते हैं यह चाहते हैं कि बारिश की यह बूंदे ना ही आए तो बेहतर है क्योंकि जब यह बारिश की बूंदे आएगी तो इनके व्यापार में कमी आ जाती है इसका कारण है कि किसान अच्छे से खेती करने लगता है और खेती में बढ़ोतरी आ जाती है इसमें सेठ साहूकारों की दिक्कत होती है वह अपने व्यापार को अच्छे से चला नहीं सकते लेकिन यह सेठ साहूकार लोग यह नहीं जान पाते की इनको व्यापार यह किसान ही देते हैं किसान ही फसल उपजा के इनके पास लाते हैं तभी यह व्याप...
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